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क्रोध वो जहर है,कहते हैं क्षमा औऱ दया धारण करने वाला सच्चा वीर होता है

क्रोध वो जहर है,कहते हैं क्षमा औऱ दया धारण करने वाला सच्चा वीर होता है
क्रोध वो जहर है,कहते हैं क्षमा औऱ दया धारण करने वाला सच्चा वीर होता है: ©Provided by Bodopress/Mithilesh, Ajmer


"क्रोध वो जहर है, इसीलिये कहते हैं कि, क्षमा औऱ दया धारण करने वाला सच्चा वीर होता है। कई  बार जैसा दिखता है वैसा होता नही और जैसा होता है वैसा दिखता नही। इसलिए क्रोध आने पर कोई निर्णय लेने से पहले विचार जरूर करे "।

✍राहुल घने जंगल में भटक गया, वह गर्मी और प्यास से व्याकुल हो गया। इधर उधर हर जगह तलाश करने पर भी उसे कहीं पानी नही मिला। प्यास से गला सूखा जा रहा था। तभी उसकी नजर एक वृक्ष पर पड़ी जहाँ एक डाली से टप-टप करती थोड़ी-थोड़ी पानी की बून्दें गिर रहीं थीं। 

वह उस वृक्ष के पास जाकर नीचे पड़े पत्तों का दोना बनाकर उन बूंँदों से दोने को भरने लगा।  जैसे तैसे बहुत समय लगने पर आखिर वह छोटा सा दोना भर ही गया। राहुल ने प्रसन्न होते हुए जैसे ही उस पानी को पीने के लिए दोने को मुँह के पास लाया तभी वहाँ सामने बैठा हुआ एक तोता टें-टें की आवाज करता हुआ आया उस दोने को झपट्टा मार कर सामने की और बैठ गया उस दोने का पूरा पानी नीचे गिर गया।

राहुल निराश हुआ कि बड़ी मुश्किल से पानी नसीब हुआ और वो भी इस पक्षी ने गिरा दिया। लेकिन, अब क्या हो सकता है । ऐसा सोचकर वह वापस उस खाली दोनें को भरने लगा। काफी मशक्कत के बाद आखिर वह दोना फिर भर गया। 

राहुल पुनः हर्षचित्त होकर जैसे ही उस पानी को पीने लगा तो वही सामने बैठा तोता टे टे करता हुआ आया और दोने को झपट्टा मार के गिरा कर वापस सामने बैठ गया ।

अब राहुल "हताशा के वशीभूत हो क्रोधित" हो उठा कि मुझे जोर से प्यास लगी है, मैं इतनी मेहनत से पानी इकट्ठा कर रहा हूँ और ये दुष्ट पक्षी मेरी सारी मेहनत को आकर गिरा देता है,  अब मैं इसे नही छोड़ूंँगा अब ये जब वापस आएगा तो इसे खत्म कर दूंँगा।

अब वह  अपने एक हाथ में दोना और दूसरे हाथ में चाबुक लेकर उस दोने को भरने लगा। काफी समय बाद उस दोने में फिर पानी भर गया। अब वह तोता पुनः टें-टें करता हुआ जैसे ही उस दोने को झपट्टा मारने पास आया वैसे ही  उस चाबुक को तोते के ऊपर दे मारा और हो गया बेचारा तोता ढेर। लेकिन दोना भी नीचे गिर गया।  

राहुल ने सोचा इस तोते से तो पीछा छूट गया लेकिन ऐसे बून्द -बून्द से कब वापस दोना भरूँगा कब अपनी प्यास बुझा पाउँगा इसलिए जहाँ से ये पानी टपक रहा है वहीं जाकर झट से पानी भर लूँ। ऐसा सोचकर वह उस डाली के पास गया, जहां से पानी टपक रहा था वहाँ जाकर देखा तो उसके पाँवो के नीचे की जमीन खिसक गई

उस डाल पर एक भयंकर अजगर सोया हुआ था और उस अजगर के मुँह से लार टपक रही थी वह जिसको पानी समझ रहा था वह अजगर की जहरीली लार थी।

राहुल के मन में पश्चाताप का समन्दर उठने लगता है ।  हे प्रभु ! मैने यह क्या कर दिया। जो पक्षी बार-बार मुझे जहर पीने से बचा रहा था ।  क्रोध के वशीभूत होकर मैने उसे ही मार दिया ।

काश, मैने सन्तों के बताये उत्तम क्षमा मार्ग को धारण किया होता,अपने क्रोध पर नियंत्रण किया होता तो मेरे हितैषी निर्दोष पक्षी की जान नही जाती l 

सीख-

मित्रों, कभी-कभी हमें लगता है, अमुक व्यक्ति हमें नाहक परेशान कर रहा है, लेकिन हम उसकी भावना को समझे बिना क्रोध कर न केवल उसका बल्कि अपना भी नुकसान कर बैठते हैं।

👉 इसीलिये कहते हैं कि, क्षमा औऱ दया धारण करने वाला सच्चा वीर होता है।

👉  क्रोध वो जहर है, जिसकी उत्पत्ति अज्ञानता से होती है और अन्त पश्चाताप से ही होता है।

कोई जरूरी नही की  जो दिखता ह वो ही सत्य हो ।।

कई  बार जैसा दिखता है वैसा होता नही और जैसा होता है वैसा दिखता नही।।

इसलिए क्रोध आने पर कोई निर्णय लेने से पहले विचार जरूर करे ।।


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